Monday, November 21, 2016

!! कृतघ्नता एकमहापाप !!

!! कृतघ्नता एकमहापाप !!

शास्त्रों में यदि किसी पाप के प्रायश्चित का विधान नहीं है तो वो एक मात्र पाप है कृतघ्नता । किसी के किये बड़े से बड़े उपकार को न मानना उसके साथ विश्वास घात करना इसे ही कृतघ्नता कहा जाता है ' कृतं परोपकारं हन्तीति कृतघ्न:' । प्रत्येक मनुष्य को कृतज्ञ होना चाहिए यही मनुष्य का आभूषण है । कृतज्ञ का लक्षण करते हुए श्रीगोविन्दराज स्वामी कहते हैं -

'कृतमुपकारं स्वल्पं प्रासंगिकमपि बहुतया जानातीति कृतज्ञ: /अपकारास्मरणम् '

अर्थात् समय पर किये थोड़े भी उपकार को बहुत किया ऐसा जानकार उसके किये अपकार को भी भूल जाने वाले को कृतज्ञ कहते हैं ।
कृतघ्न का कोई प्रायश्चित नहीं होता । महाभारत के शान्ति पर्व में आया है -

        ' ब्रह्मघ्ने च सुरापे च चौरे भग्नव्रते तथा ।
        निष्कृतिर्विहिता राजन् कृतघ्ने नास्ति निष्कृति ।।१७२/२५
        मित्रद्रोही नृशंसश्च कृतघ्नश्च नराधमः ।
       क्रव्यादै:कृमिभिश्चैव न भुज्यन्ते हि तादृशाः'।।१७२/२६

ब्राह्मण के हत्यारे , सुरा पान करने वाले , चोरी करने वाले तथा खंडित व्रत वाले प्राणी के लिए शास्त्रों में प्रायश्चित का विधान है किन्तु कृतघ्न के लिए कदापि नहीं । मित्र से द्रोह करने वाले , क्रूर प्राणी और कृतघ्न इन नीच मनुष्यों का मांस भक्षण भी मांसभक्षी जीव और कृमि नहीं करते हैं । अर्थात् ये इतने पापी होते हैं कि ये मांसभक्षी भी इनको खाना नहीं चाहते हैं । आगे कहते हैं-

      'कुतः कृतघ्नस्य यशः कुतः स्थानं कुतः सुखम्।
      अश्रद्धेय: कृतघ्नो हि कृतघ्ने नास्ति निष्कृतिः '।।१७३/२०
   
कृतघ्न प्राणी के लिए कहाँ यश है ,कहाँ सुख है , कहाँ स्थान है एवं कहाँ उसके लिए श्रद्धा है अर्थात् कहीं भी उसे कुछ भी प्राप्त नहीं है यहाँ तक कि शास्त्रों द्वारा बताया गया प्रायश्चित भी उसके लिए नहीं है । कृतघ्न की बहुत निंदा शास्त्रों में की गयी है । इसी लिए कभी भी किसी के अनजाने में भी किये गए उपकार को भूलना नहीं चाहिए ।लेकिन  आज समाज की दुर्दशा देखिये किे जो व्यक्ति आपको आगे बढ़ाता है , समाज में सम्मान दिलाता है हम जरूरत पड़ने पर स्वार्थ वशात उसको भी धोखा देने में पीछे नहीं हटते । जब तक हमारी हाँ में हाँ तब तक बहुत अच्छा ज़रा सी न तो बड़े से बड़ा उपकार भी भूल कर उसके लिए गड्ढा खोदने लग जाते हैं । इससे बड़ी कृतघ्नता क्या होगी ? आज बड़े बड़े स्वयंभूओं के भाग्य विधाता जिनकी कृपा से आज वो समाज में कुछ कहने लायक हुए वो बेचारे गुरु जन किसी तरह अपना समय काटते हैं लेकिन वो स्वयंभू एक बार भी अपने उन गुरुओं की सुध नहीं लेते क्या ये कृतघ्नता नहीं है ? आज बड़े बड़े मठ मंदिरों की दुर्गति क्यों हो रही है जरा विचार करिये इसके पीछे भी ये कृतघ्न ही हैं । इन लोगों को उस गद्दी पर बैठाने वाले उनके आचार्य में सोचा होगा कि ये इसकी रक्षा करेंगें इसका वर्धन करेंगें लेकिन आज के कितने ही कृतघ्नों ने अपने आचार्यों तक को नहीं छोड़ा उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया । एक ही संप्रदाय में भेद कर कर के अलग थलग कर दिया क्या इस महापाप से इनको श्री रामानुज स्वामी जी बचायेंगें कदापि नहीं । इसकी भरपाई ये स्वयं करेंगें और गोस्वामी जी की चौपाई को चरितार्थ करेंगें -
             ' उभय लोक निज हाथ गवावहिं '
संसार में सच बोलने से लोग बुरे बन जाते हैं । लेकिन क्या करूँ चापलूसी न तो कर पाता हूँ न ही करना चाहता हूँ ।

                      ।।  जय श्रीमन्नारायण ।।

Sunday, November 20, 2016

*आज का पंचांग*

.       ।। 🕉 ।।
  🚩 🌞 *सुप्रभातम्* 🌞 🚩
««« *आज का पंचांग* »»»
कलियुगाब्द.............5118
विक्रम संवत्...........2073
शक संवत्..............1938
मास..................मार्गशीर्ष
पक्ष.......................कृष्ण
तिथी...................अष्टमी
रात्रि 02.23 पर्यंत पश्चात नवमी
तिथिस्वामी................वसु
नित्यदेवी..............त्वरिता
रवि.................दक्षिणायन
सूर्योदय.......06.44.19 पर
सूर्यास्त.......05.41.35 पर
नक्षत्र......................मघा
दुसरे दिन प्रातः 05.08 पर्यंत पश्चात पूर्वाफाल्गुनी
योग.........................इंद्र
रात्रि 12.25 पर्यंत पश्चात वैधृति
करण....................बालव
दोप 02.03 पर्यन्त पश्चात कौलव
ऋतु........................हेमंत
दिन.....................सोमवार

🇬🇧 *आंग्ल मतानुसार* :-
21 नवम्बर सन 2016 ईस्वी ।

👁‍🗨 *राहुकाल* :-
प्रात: 08.08 से 09.29 तक ।

🚦 *दिशाशूल* :-
पूर्व दिशा- यदि आवश्यक हो तो दर्पण देखकर यात्रा प्रारंभ करें।

☸ शुभ अंक...............4
🔯 शुभ रंग..............लाल

✡ *चौघडिया* :-
प्रात: 06.47 से 08.08 तक अमृत
प्रात: 09.29 से 10.50 तक शुभ
दोप. 01.33 से 02.54 तक चंचल
अप. 02.54 से 04.15 तक लाभ
सायं 04.15 से 05.37 तक अमृत
सायं 05.37 से 07.15 तक चंचल ।

💮 *आज का मंत्र* :-
|| ॐ विश्वदेवाय नमः ||

 *संस्कृत सुभाषितानि* :-
*अष्टादशोऽध्यायः - मोक्षसंन्यासयोग :-*
भक्त्या मामभिजानाति
यावान्यश्चास्मि तत्त्वतः ।
ततो मां तत्त्वतो ज्ञात्वा
विशते तदनन्तरम् ॥१८- ५५॥
अर्थात :-
उस पराभक्ति के द्वारा वह मुझ परमात्मा को, मैं जो हूँ और जितना हूँ, ठीक वैसा-का-वैसा तत्त्व से जान लेता है तथा उस भक्ति से मुझको तत्त्व से जानकर तत्काल ही मुझमें प्रविष्ट हो जाता है॥55॥

🍃 *आरोग्यं* :-
कान में पीब (मवाद) होने परः

पहला प्रयोगः फुलाये हुए सुहागे को पीसकर कान में डालकर ऊपर से नीं बू के रस की बूँद डालने से मवाद निकलना बंद होता है ।
मवाद यदि सर्दी से है तो सर्दी मिटाने के उपाय करें। साथ में सारिवादीवटी 1 से 3 गोली
दिन में दो बार व त्रिफला गुग्गल 1 से 3 गोली दिन में तीन बार सेवन करना चाहिए।

दूसरा प्रयोगः शुद्ध सरसों या तिल के तेल में लहसुन की कलियों को पकाकर 1-2 बूँद सुबह-शाम कान में डाल ने से फायदा होता है ।

⚜ *आज का राशिफल* :-

🐑 *राशि फलादेश मेष* :-
नई योजना में लाभ के योग हैं। आमदनी बढ़ने से निवेश में वृद्धि होगी। श्रेष्ठजनों से मेल आपकी उन्नति में सहायक हो सकता है।
                   
🐂 *राशि फलादेश वृष* :-
परिवार के सदस्यों की चिंता रहेगी। बोलचाल में संयम रखें। संतान की गतिविधियों पर नजर रखें। कार्य में विस्तार होगा। कानूनी काम होंगे।
                     
👫 *राशि फलादेश मिथुन* :-
भूमि, आवास की समस्याओं में वृद्धि की आशंका है। प्रयास में आलस्य व विलंब नहीं करें। व्यय में कटौती का प्रयास करें।
                   
🦀 *राशि फलादेश कर्क* :-
आर्थिक चिंता के कारण मन में असंतोष रहेगा। लक्ष्य को ध्यान में रखकर प्रयत्न करें, सफलता मिलेगी। नौकरी में पदोन्नति के योग हैं।
                
🦁 *राशि फलादेश सिंह* :-
परिवार में सहयोग का वातावरण रहेगा। कटु वचनों का प्रयोग न करें। व्यापार में विस्तार हेतु प्रयास अधिक करना पड़ेगा। संपर्क क्षेत्र बढ़ेगा।
    
👸🏻 *राशि फलादेश कन्या* :-
आज विशेष लाभ होने की संभावना है। अनुकूल समाचार मिलेंगे। संतान की ओर से सुखद स्थिति बनेगी। दुस्साहस नहीं करें।
             
⚖ *राशि फलादेश तुला* :-
व्यापार में सफलता मिलेगी। कानूनी उलझनें बढ़ सकती हैं। मकान संबंधी समस्या का समाधान होगा। आजीविका में इच्छित लाभ के योग हैं।
                  
🦂 *राशि फलादेश वृश्चिक* :-
विलासिता की वस्तु क्रय करने का योग बनेगा। कार्यस्थिति में सुधार की संभावना है। पारिवारिक समस्या की ओर ध्यान दें।
                 
🏹 *राशि फलादेश धनु* :-
बुद्धिमानी से कई रुके कार्य पूर्ण होने के योग बनेंगे। संपत्ति के लेन-देन में सावधानी रखें। कामकाज की जिज्ञासा बढ़ेगी। संत समागम होगा।
                    
🐊 *राशि फलादेश मकर* :-
प्रिय व्यक्ति से भेंट होगी। बुद्धिमानी से समस्या का समाधान होगा। व्यापार में सफलता मिलेगी। अनायास लाभ होने के योग हैं।
                
🏺 *राशि फलादेश कुंभ* :-
शुभ कार्यों में संलग्न होने से सुयश एवं सम्मान मिलेगा। पराक्रम बढ़ेगा। नवीन उपलब्धियों के साथ अनायास लाभ के योग बनेंगे।
              
🐟 *राशि फलादेश मीन* :-
आजीविका संबंधी प्रयासों में इच्छानुरूप सफलता प्राप्त नहीं होगी। लाभ में कमी आएगी। व्यर्थ के विवाद उलझन में डाल सकते हैं।
           
☯ आज का दिन सभी के लिए मंगलमय हो ।

।। 🐚 *शुभम भवतु* 🐚 ।।

🇮🇳🇮🇳 *भारत माता की जय* 🚩🚩

Wednesday, November 16, 2016

संघ नियमावली

ॐसच्चा नामधेयाय श्री गुरवे परमात्मने नमः

~~~~~~~~~~~~|
जिसका पालन करना "धर्मार्थ वार्ता समाधान संघ"के सभी विद्वत आचार्यसदस्यों को अनिवार्य होगा।
धर्मार्थ वा०स० संघ-नियमावली
_______________________
१.सर्व प्रथम संघ के सभी आदरणीय श्रेष्ठ विद्वत आचार्य गणों से वार्ता करते समय उनके नाम के आगे सम्मान सूचक शब्द अवश्य लगायें।
२.श्रेष्ठ आचार्य गणों द्वारा छोटों को भी उचित सम्मान से ही संबोधित किया जाये।
३.आपसी शिष्टाचार एवम्
सौम्यता बनाते हुये सब से प्रेम पूर्वक सदाचार का परिचय दें |
४.किसी भी सदस्य के प्रति हीन भावना न रखते हुये सब को अपने परिवार का अभिन्न अंग माने।
५.किसी भी विद्वत सदस्य के ऊपर कोई भी ऐसी टिप्पणी न करें जिससे किसी का मन आहत हो या किसी को दुःख पहुँचे।
६.संघ के नाम एवम् प्रोफाइल फोटो से किसी प्रकार की छेड़खानी न करें यह कार्य संस्थापक महोदय एवं संचालक समिति के अंतर्गत आता है।
७.किसी भी प्रकार के अनावश्यक मैसेज न भेजें,जैसे चुटकुले, शायरी,कॉमेडी या 'ये मैसेज २० लोगो को शेयर करो शाम तक अच्छी खबर मिलेगी नहीँ तो आपका अनिष्ट होगा'_ इस प्रकार के मैसेज भेजना दण्डनीय अपराध माना जायेगा।
८.संघ में मात्र केवल सनातन धर्म,आध्यात्म,पुराण,
वेदोपनिषद् ,समस्त सनातन धर्म से सम्बंधित संग्रह ही भेजें। वह भी लिखित इमेज लेख न हो |
९.किसी भी सदस्य के प्रति हास परिहास,आपत्तिजनक टिप्पणी न करें,जिससे किसी भी प्रकार का विवाद हो।
१०.किसी भी सदस्य को अपनी विद्वता से निचा दिखाने का प्रयास न करें,बल्कि अपने ज्ञान को प्रेम पूर्वक प्रस्तुत करें।
११.किसी भी प्रश्न के ऊपर चल रही वार्ता समाधान  के वक्त दूसरे पोस्ट न भेजें |
१२.कोई भी चित्र या वीडियो फोटो भेजना विशेष मुख्य रूप से वर्जित है इसका विशेष ध्यान रखें |किसी भी सदस्य द्वारा इमेज या वीडियो भेजे जाने पर,समिति द्वारा २४ घंटे के लिये तत्काल निष्कासित किया जायेगा |कारण स्पष्ट होने के बाद ही पुन: जोड़ा जा सकता है |
१३.संघ में किसी भी नए अतिथि विद्वान के आने पर उनका समुचित स्वागत अभिवादन करना हम सब के अच्छे शिष्टाचार का परिचायक है |
१४.किसी भी सदस्य से किसी प्रकार की त्रुटि होने पर उनके प्रति अन्य कोई सदस्य न उलझें। उसका समाधान, प्रशासनिक श्रेष्ठ गुरुजनों द्वारा या संघ संस्थापक द्वारा किया जायेगा। यदि किसी को किसी से शिकायत है तो वे संस्थापक महोदय या प्रसाशनिक समिति के किसी भी गुरूजन सदस्यों से पर्सनल एकाउंट में जाकर अपनी बात रख सकते हैं !
१५.अगर अपने निजी कारणों बस कोई भी सदस्य संघ से बाहर होना चाहते हैं तो कृपया सूचना अवश्य देने की कृपा करें।
१६.संघ के नियमो को कुछ और सुदृढ़ बनाने के लिए आप सब अपनी राय दे सकते हैं संस्थापक महोदय के पर्शनल में।
१७."आप सभी विद्वत जन अपने प्रोफाइल में अपनी फोटो व अपना नाम अवश्य लिखें |
१८.कभी कभी मनोविनोद एवं मनोरंजन की वार्ता को अन्यथा न लेकर आनन्द की अनुभूति करें क्यों कि इस भागदौड़भरे जीवन में हसना और हसाना भी बहुत आवश्यक है ! लेकिन हास्य सामाजिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुये करें |
१९.संघ में किसी भी पोस्ट को दुबारा पोस्ट करना वर्जित है किसी सदस्य के आग्रह करने पर ही दुबारा पोस्ट भेज सकते हैं |
२०.संघ को और मजबूत बनाने हेतु विशिष्ठ विद्वत जनों की आवश्यकता होती है,अतः जिन विद्वत जनों के सम्पर्क में अच्छे शुमधुर व्यवहार वाले ज्ञानमय ब्राम्हण हों,उन विद्वानों को जोड़ने के लिए संस्थापक महोदय या समिति के गुरू जनों से सम्पर्क कराएं तथा उन्हें संघ के नियमो से भी अवगत कराये |
२१.संघ में वार्ता करने का समय सुबह ५:३०से रात्रि ११:००तक विशेष आवश्यकता पड़ने पर १२:००तक
२२. संघ में किसी भी प्रकार के लिंक भेजना वर्जित है!!!!!!!! 
२३.धर्मार्थ वार्ता समाधान की प्रशासनिक-सूची :—
१--स्वतंत्र प्रभार--:श्री मान संतोष मिश्र (शोष जी)
श्रीमान् विजयभान गोस्वामी जी
२--न्यायाधीश--:श्रीमान् सत्यप्रकाश अनुरागी जी 
३--उप न्यायाधीश--: यज्ञाचार्य श्रीमान ब्रजभूषण त्रिपाठी जी 
४.संस्थापक एवं अध्यक्ष--: श्रीमान् मंगलेश्वर त्रिपाठी जी 
५.उपाध्यक्ष--:श्रीमान् अनिल पाण्डेय जी(मुं.दे.)
६.कोशाध्यक्ष--: श्रीमान दीना नाथ तिवारी जी
७.प्रवक्ता--:श्रीमान् ओमीश जी (कोपरखैरणे महालक्ष्मी मन्दिर)
एवं श्रीमान् विद्यानिधि जी
८.--:सचिव--:श्रीमान पं. आलोक शास्त्री जी 
९.उप सचिव--:रोहित परासर जी
१०.संयोजक--:श्रीमान् सत्यप्रकाश शुक्ल जी (हिमांचल) 
श्रीमान संदीप त्रिपाठी जी 
श्रीमान शिव शंकर मिश्र जी (प्रयाग) 
११.मार्गदर्शक--:श्रीमान् सूर्यमणि मिश्र जी,श्रीमान बलभद्र उपाध्याय जी,श्रीमान शिवाकान्त त्रिपाठी जी,श्रीमान सान्ति भूषण त्रिपाठी जी,
श्रीमान नीरजधर द्विवेदी जी 
श्रीमान पवनेश शुक्ल जी
श्रीमान पद्मधर मिश्र जी
१२--:व्यवस्थापक ÷श्रीमान् रवीन्द्र व्यास जी (यू-पी भवन नवी मुंबई) एवं समस्त धर्मार्थ परिवार !
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जयतु गुरुदेव, जयतु भारतम्

संघ नियमावली

Sunday, November 6, 2016

'उगते सूरज की पूजा' तो संसार का विधान है

'उगते सूरज की पूजा' तो संसार का विधान है, पर केवल और केवल हम 'भारतवासी' अस्ताचल सूर्य की भी अराधना करते हैं, और वो भी, उगते सूर्य से पहले। अगर 'उदय' का 'अस्त' भौगोलिक नियम है, तो 'अस्त' का 'उदय' प्राकृतिक और आध्यात्मिक सत्य।

प्रकृति के अंतिम स्वरूप और ऊर्जा के अक्षुण्ण श्रोत , भगवान भास्कर की अराधना का पर्व 'छठ' की शुभकामनाएँ।

Friday, October 28, 2016

धनतेरश का त्योहार दीपावली आने की पूर्व सूचना देता है।

आप को धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाऐँ। हम सब को बल, बुद्धि, ज्ञान, भक्ति 
और वैराग्य मिलता रहे यही भगवान से प्रार्थना है।
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धनतेरश का त्योहार दीपावली आने की पूर्व सूचना देता है। हमारे देश में 
सर्वाधिक धूमधाम से मनाए जाने वाले त्योहार दीपावली का प्रारंभ धनतेरस से 
हो जाता है। इसी दिन से घरों की लिपाई-पुताई प्रारम्भ कर देते हैं। 
दीपावली के लिए विविध वस्तुओं की ख़रीद आज की जाती है। इस दिन से कोई 
किसी को अपनी वस्तु उधार नहीं देता। इसके उपलक्ष्य में बाज़ारों से नए 
बर्तन, वस्त्र, दीपावली पूजन हेतु लक्ष्मी- गणेश, खिलौने, खील-बताशे तथा 
सोने- चांदीके जेवर आदि भी ख़रीदे जाते हैं। 
आज ही के दिन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के जन्मदाता धन्वन्तरिवैद्य 
समुद्र से अमृत कलश लेकर प्रगट हुए थे, इसलिए धनतेरस को धन्वन्तरि जयन्ती 
भी कहते हैं। इसीलिए वैद्य-हकीम और ब्राह्मण समाज आज धन्वन्तरि भगवान का 
पूजन कर धन्वन्तरि जयन्ती मनाता है। 
*महत्त्व* 
धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी इस दिन का विशेष महत्त्व है। शास्त्रों 
में इस बारे में कहा है कि जिन परिवारों में धनतेरस के दिन यमराज के 
निमित्त दीपदान किया जाता है, वहां अकाल मृत्यु नहीं होती। घरों में 
दीपावली की सजावट भी आज ही से प्रारम्भ हो जाती है। इस दिन घरों को 
स्वच्छ कर, लीप-पोतकर, चौक, रंगोली बना सायंकाल के समय दीपक जलाकर 
लक्ष्मी जी का आवाहन किया जाता है। इस दिन पुराने बर्तनों को बदलना व नए 
बर्तन ख़रीदना शुभ माना गया है। इस दिन चांदी के बर्तन ख़रीदने से तो 
अत्यधिक पुण्य लाभ होता है। इस दिन हल जुती मिट्टी को दूधमें भिगोकर 
उसमें सेमर की शाखा डालकर लगातार तीन बार अपने शरीर पर फेरना तथा कुंकुम 
लगाना चाहिए। कार्तिक स्नानकरके प्रदोष काल में घाट, गौशाला, कुआं, 
बावली, मंदिर आदि स्थानों पर तीन दिन तक दीपक जलाना चाहिए। तुला राशि के 
सूर्य में चतुर्दशी व अमावस्या की सन्ध्या को जलती लकड़ी की मशाल से 
पितरों का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए। 
*!! धनतेरस की यमराज को दीप देने की कथा !!*
धनतेरस की शाम घर के बाहर मुख्य द्वार पर और आंगन में दीप जलाने की प्रथा 
भी है। इस प्रथा के पीछे एक लोक कथा है, कथा के अनुसार किसी समय में एक 
राजा थे जिनका नाम हेम था। दैव कृपा से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति 
हुई। ज्योंतिषियों ने जब बालक की कुण्डली बनाई तो पता चला कि बालक का 
विवाह जिस दिन होगा उसके ठीक चार दिन के बाद वह मृत्यु को प्राप्त होगा। 
राजा इस बात को जानकर बहुत दुखी हुआ और राजकुमार को ऐसी जगह पर भेज दिया 
जहां किसी स्त्री की परछाई भी न पड़े। दैवयोग से एक दिन एक राजकुमारी उधर 
से गुजरी और दोनों एक दूसरे को देखकर मोहित हो गये और उन्होंने गन्धर्व 
विवाह कर लिया। 
विवाह के पश्चात विधि का विधान सामने आया और विवाह के चार दिन बाद यमदूत 
उस राजकुमार के प्राण लेने आ पहुंचे। जब यमदूत राजकुमार प्राण ले जा रहे 
थे उस वक्त नवविवाहिता उसकी पत्नी का विलाप सुनकर उनका हृदय भी द्रवित हो 
उठा परंतु विधि के अनुसार उन्हें अपना कार्य करना पड़ा। यमराज को जब 
यमदूत यह कह रहे थे उसी वक्त उनमें से एक ने यमदेवता से विनती की हे 
यमराज क्या कोई ऐसा उपाय नहीं है जिससे मनुष्य अकाल मृत्यु के लेख से 
मुक्त हो जाए। दूत के इस प्रकार अनुरोध करने से यमदेवता बोले हे दूत अकाल 
मृत्यु तो कर्म की गति है इससे मुक्ति का एक आसान तरीका मैं तुम्हें 
बताता हूं सो सुनो। कार्तिक कृष्ण पक्ष की रात जो प्राणी मेरे नाम से 
पूजन करके दीप माला दक्षिण दिशा की ओर भेट करता है उसे अकाल मृत्यु का भय 
नहीं रहता है। यही कारण है कि लोग इस दिन घर से बाहर दक्षिण दिशा की ओर 
दीप जलाकर रखते हैं। 🌷🙏🌷

*वर्षोद्भवम्*

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               *वर्षोद्भवम्*
               *शरत्पक्वधान्यम्,*
               *आल्हादकम्*
               *हेमंत-शिशीरशैत्यम्।*
               *मिष्टान्नभोगम्*
               *नववसनयोगम्,*
               *आनंदपर्वम्*
               *दीपोत्सवोऽयम्॥*
                    *...........*
               *॥शुभदीपावली॥*

आज से आरंभ दिपउत्सव की
आपको हार्दिक शुभकामनाये .....