Friday, January 20, 2017

समय की .. इस अनवरत बहती धारा में .. अपने चंद सालों का .. हिसाब क्या रखें .. !!

💐💐💐Beautiful lines 💐💐💐

समय की .. इस अनवरत बहती धारा में ..
अपने चंद सालों का .. हिसाब क्या रखें .. !!

जिंदगी ने .. दिया है जब इतना .. बेशुमार यहाँ ..
तो फिर .. जो नहीं मिला उसका हिसाब क्या रखें .. !!

दोस्तों ने .. दिया है .. इतना प्यार यहाँ ..
तो दुश्मनी .. की बातों का .. हिसाब क्या रखें .. !!

दिन हैं .. उजालों से .. इतने भरपूर यहाँ ..
तो रात के अँधेरों का .. हिसाब क्या रखे .. !!

खुशी के दो पल .. काफी हैं .. खिलने के लिये ..
तो फिर .. उदासियों का .. हिसाब क्या रखें .. !!

हसीन यादों के मंजर .. इतने हैं जिंदगानी में ..
तो चंद दुख की बातों का .. हिसाब क्या रखें .. !!

मिले हैं फूल यहाँ .. इतने किन्हीं अपनों से ..
फिर काँटों की .. चुभन का हिसाब क्या रखें .. !!

चाँद की चाँदनी .. जब इतनी दिलकश है ..
तो उसमें भी दाग है .. ये हिसाब क्या रखें .. !!

जब खयालों से .. ही पुलक .. भर जाती हो दिल में ..
तो फिर मिलने .. ना मिलने का .. हिसाब क्या रखें .. !!

कुछ तो जरूर .. बहुत अच्छा है .. सभी में यारों ..
फिर जरा सी .. बुराइयों का .. हिसाब क्या रखें .. !!

              👌बहूत सुंदर कथा👌

                ☺मेरा वृन्दावन☺

एक राजा ने भगवान कृष्ण का एक मंदिर बनवाया
और पूजा के लिए एक पुजारी को लगा दिया. पुजारी बड़े भाव से
बिहारीजी की सेवा करने लगे. भगवान की पूजा-अर्चना और
सेवा-टहल करते पुजारी की उम्र बीत गई. राजा रोज एक फूलों की
माला सेवक के हाथ से भेजा करता था.पुजारी वह माला बिहारीजी
को पहना देते थे. जब राजा दर्शन करने आता तो पुजारी वह माला बिहारीजी के गले से उतारकर राजा को पहना देते थे. यह रोज का
नियम था. एक दिन राजा किसी वजह से मंदिर नहीं जा सका.
उसने एक सेवक से कहा- माला लेकर मंदिर जाओ. पुजारी से कहना
आज मैं नहीं आ पाउंगा. सेवक ने जाकर माला पुजारी को दे दी और
बता दिया कि आज महाराज का इंतजार न करें. सेवक वापस आ
गया. पुजारी ने माला बिहारीजी को पहना दी. फिर उन्हें विचार आया कि आज तक मैं अपने बिहारीजी की चढ़ी माला
राजा को ही पहनाता रहा. कभी ये सौभाग्य मुझे नहीं
मिला.जीवन का कोई भरोसा नहीं कब रूठ जाए. आज मेरे प्रभु ने
मुझ पर बड़ी कृपा की है. राजा आज आएंगे नहीं, तो क्यों न माला
मैं पहन लूं. यह सोचकर पुजारी ने बिहारीजी के गले से माला
उतारकर स्वयं पहन ली. इतने में सेवक आया और उसने बताया कि राजा की सवारी बस मंदिर में पहुंचने ही वाली है.यह सुनकर
पुजारी कांप गए. उन्होंने सोचा अगर राजा ने माला मेरे गले में देख
ली तो मुझ पर क्रोधित होंगे. इस भय से उन्होंने अपने गले से
माला उतारकर बिहारीजी को फिर से पहना दी. जैसे ही राजा
दर्शन को आया तो पुजारी ने नियम अुसार फिर से वह माला
उतार कर राजा के गले में पहना दी. माला पहना रहे थे तभी राजा को माला में एक सफ़ेद बाल दिखा.राजा को सारा माजरा समझ गया
कि पुजारी ने माला स्वयं पहन ली थी और फिर निकालकर
वापस डाल दी होगी. पुजारी ऐसाछल करता है, यह सोचकर राजा
को बहुत गुस्सा आया. उसने पुजारी जी से पूछा- पुजारीजी यह
सफ़ेद बाल किसका है.? पुजारी को लगा कि अगर सच बोलता हूं
तो राजा दंड दे देंगे इसलिए जान छुड़ाने के लिए पुजारी ने कहा- महाराज यहसफ़ेद बाल तो बिहारीजी का है. अब तो राजा गुस्से
से आग- बबूला हो गया कि ये पुजारी झूठ पर झूठ बोले जा रहा
है.भला बिहारीजी के बाल भी कहीं सफ़ेद होते हैं. राजा ने कहा-
पुजारी अगर यह सफेद बाल बिहारीजी का है तो सुबह शृंगार के
समय मैं आउंगा और देखूंगा कि बिहारीजी के बाल सफ़ेद है या
काले. अगर बिहारीजी के बाल काले निकले तो आपको फांसी हो जाएगी. राजा हुक्म सुनाकर चला गया.अब पुजारी रोकर
बिहारीजी से विनती करने लगे- प्रभु मैं जानता हूं आपके
सम्मुख मैंने झूठ बोलने का अपराध किया. अपने गले में डाली
माला पुनः आपको पहना दी. आपकी सेवा करते-करते वृद्ध हो
गया. यह लालसा ही रही कि कभी आपको चढ़ी माला पहनने का
सौभाग्य मिले. इसी लोभ में यह सब अपराध हुआ. मेरे ठाकुरजी पहली बार यह लोभ हुआ और ऐसी विपत्ति आ पड़ी है. मेरे
नाथ अब नहींहोगा ऐसा अपराध. अब आप ही बचाइए नहीं तो
कल सुबह मुझे फाँसी पर चढा दिया जाएगा. पुजारी सारी रात रोते
रहे. सुबह होते ही राजा मंदिर में आ गया. उसने कहा कि आज
प्रभु का शृंगार वह स्वयं करेगा. इतना कहकर राजा ने जैसे ही मुकुट
हटाया तो हैरान रह गया. बिहारीजी के सारे बाल सफ़ेद थे. राजा को लगा, पुजारी ने जान बचाने के लिए बिहारीजी के बाल रंग
दिए होंगे. गुस्से से तमतमाते हुए उसने बाल की जांच करनी
चाही. बाल असली हैं या नकली यब समझने के लिए उसने जैसे
ही बिहारी जी के बाल तोडे, बिहारीजी के सिर से खून
कीधार बहने लगी. राजा ने प्रभु के चरण पकड़ लिए और क्षमा
मांगने लगा. बिहारीजी की मूर्ति से आवाज आई- राजा तुमने आज तक मुझे केवल मूर्ति ही समझा इसलिए आज से मैं तुम्हारे
लिए मूर्ति ही हूँ. पुजारीजी मुझे साक्षात भगवान् समझते हैं.
उनकी श्रद्धा की लाज रखने के लिए आज मुझे अपने बाल सफेद
करने पड़े व रक्त की धार भी बहानी पड़ी तुझे समझाने के लिए.
यह कहानी किसी पुराण से तो नहीं है लेकिन इसका मर्म
किसी पुराण की कथा से कम भी नहीं है. कहते हैं- समझो तो देव नहीं तो पत्थर.श्रद्धा हो तो उन्हीं पत्थरों में भगवान सप्राण
होकर भक्त से मिलने आ जाएंगे ।।

श्री वृन्दावन बांके बिहारी लाल की जय हो  ।।

मैंने सुना है एक साधु और एक वेश्या की एक साथ मृत्यु हुई,

मैंने सुना है
एक साधु और एक वेश्या की
एक साथ मृत्यु हुई,
एक ही दिन।
आमने-सामने घर था।
मृत्यु के दूत लेने आए,
तो दूत बड़ी मुश्किल में पड़ गए।
उन्हें फिर जाकर
हेड आफिस में पता लगाना पड़ा
कि मामला क्या है!
क्योंकि संदेश में कुछ भूल मालूम पड़ती थी।

साधु को ले जाने की आज्ञा हुई नर्क,
और वेश्या को आज्ञा हुई स्वर्ग!
तो उन्होंने कहा,
इसमें जरूर कहीं भूल हो गई है!
साधु बड़ा साधु था,
वेश्या भी कोई छोटी वेश्या नहीं थी।
मामला सीधा साफ है,
गणित में कोई गड़बड़ है।
वेश्या को नर्क जाना चाहिए,
साधु को स्वर्ग जाना चाहिए।

काश,
जिंदगी इतनी सीधी होती,
तो सभी वेश्याएं नर्क चली जातीं
और सभी साधु स्वर्ग चले जाते।
लेकिन जिंदगी इतनी सीधी नहीं है,
जिंदगी बहुत जटिल है।

ऊपर से पता लगाकर लौटे।
खबर मिली कि वही ठीक आज्ञा है,
वेश्या को स्वर्ग ले आओ,
साधु को नर्क।

उन्होंने पूछा,
थोड़ा हम समझ भी लें,
क्योंकि हम बड़ी दुविधा में पड गए हैं।
तो पता चला
कि जब भी साधु के घर में सुबह कीर्तन होता, तो !
वेश्या रोती अपने घर में।
सामने ही घर था।

रोती,
रोती इस मन से कि
मेरा जीवन व्यर्थ गया।
कब वह क्षण आएगा सौभाग्य का
कि ऐसे कीर्तन में मैं भी सम्मिलित हो जाऊं!
मन भी होता,
तो कभी द्वार के बाहर निकल आती।
साधु के मंदिर के पास कान लगाकर खड़ी हो जाती दीवाल के। लेकिन मन में ऐसा लगता कि मुझ जैसी पापी मंदिर में कैसे प्रवेश करे!
तो कहीं साधु पता न चल जाए,
इसलिए चुपचाप छिप-छिपकर कीर्तन सुनती। मंदिर की सुगंध उठती, धूप जलती, मंदिर के फूलों की खबर आती, मंदिर का घंटा बजता, और चौबीस घंटे, पूरे जीवन वेश्या मंदिर में रही। चित्त मंदिर में घूमता रहा, घूमता रहा, घूमता रहा। और एक ही कामना थी कि अगले जन्म में चाहे बुहारी ही लगानी पड़े, पर मंदिर में ही जन्म हो। मंदिर के द्वार पर ही!

साधु भी कुछ पीछे न थे वेश्या से। जब भी वेश्या के घर रात। राग-रंग छिड़ जाता, आधी रात होती, तो वे करवट बदलते रहते! वे सोचते, सारी दुनिया मजा लूट रही है। हम कहां फंस गए!  इसलिए ध्यान रहे, पुजारी परमात्मा से जितने दूर रह जाते हैं, उतना शायद ही कोई रह पाता हो। क्योंकि पुजारी को प्रयोजन ही नहीं रह जाता। उसका मतलब कुछ और है। यह उसके लिए धंधा है।

उपासना आप उधार नहीं करवा सकते, आपको ही करनी पड़ेगी। और ऐसी उपासना का कोई मूल्य नहीं है कि मंदिर में तो परमात्मा के निकट होते हों और मंदिर के बाहर निकलते ही परमात्मा खो जाता हो। ऐसी उपासना से क्या होगा? अगर वह है, तो सब जगह है। और अगर नहीं है, तो कहीं भी नहीं है, मंदिर में भी नहीं है। अगर नहीं है, तो सब मंदिर व्यर्थ हैं। और अगर है, तो सारी पृथ्वी, सारा जगत उसका मंदिर है।

एक वृक्ष के पास बैठें, तो भी परमात्मा के पास बैठें। और एक पशु के पास खड़े हों, तो भी परमात्मा के पास खड़े हों। एक मित्र पास हो, तो भी परमात्मा पास हो, और एक शत्रु पास हो, तो भी परमात्मा पास हो। आपके लिए वही रह जाए। जितना यह बढ़ता चला जाए विस्तार, जितनी यह प्रतीति उसकी गहन होती चली जाए, उतने ही आप उपासना में रत हो रहे हैं।

उपासना का अर्थ होता है, उसके पास बैठना। कहीं भी बैठे हों, अगर अनुभव करें कि परमात्मा के पास बैठे हैं, तो उपासना हो गई। घर में बैठे हों, कि मंदिर में, कि जंगल में, कहीं भी बैठे हों, अगर उसकी उपस्थिति अनुभव कर सकें, अगर अनुभव कर सकें उसका स्पर्श—कि हवाओं में वही छूता है, और सूरज की किरणों में वही आता है, और पक्षियों के गीत में उसी के गीत हैं, और वृक्षों में जो सरसराहट होती है हवा की, पत्ते जो कंपते हैं, वही कंपता है, सागर की जो लहर हिलती है, यह उसी की तरंगें हैं—अगर ऐसी प्रतीति हो सके, तो उपासना हो गई।

- ओशो

जीव के श्री राम के सन्मुख और विमुख होने का परिणाम । सन्मुख-

जीव के श्री राम के सन्मुख और विमुख होने का परिणाम ।
सन्मुख-
"सन्मुख होई जीव मोहि जबहीं,जन्म कोटि अघ नासहिं तबहीं".

जैसे ही जीव मेरे सन्मुख होता है उसके करोडो जन्मों के पाप स्वतः ही भस्म हो जाते हैं.सन्मुख होने का मतलब किसी मंदिर,मस्जिद,गुरूद्वारे में जाकर मूर्ति के सामने खड़ा होना नहीं है.मन में श्री राम की छबि को स्थापित करना है.
लंकिनी हनुमान जी महाराज को आशीर्वाद दे रही है-
"प्रविसी नगर कीजै सब काजा,ह्रदय राख कौशलपुर राजा".
माता जानकी हनुमान जी को आशीर्वाद दे रही हैं-
"देखि बुद्धि बल निपुण कपि,कहेहु जानकी जाहु.
रघुपति चरण ह्रदय धरी,तात मधुर फल खाऊ".
अर्थात सन्मुख होने का मतलब तन से नहीं है मन से है.मन यदि श्री राम के चरणों में पहुँच जाता है तो मन ही तो सुख दुःख का अनुभव करता है.फिर तन के सुख-दुःख का कोई भी भान नहीं होता.
"मन-तहं जहं रघुवर बैदेही,बिनु मन तन दुःख सुख सुधि केही".
जैसे कोई हमारे शरीर में एक सुई चुबोये,क्योंकि मन शरीर के साथ है इसलिए हम दुःख का अनुभव कर चिल्ला उठते हैं.परन्तु डाक्टर पूरा पेट फाड़ देता है हमे पता भी नहीं चलता.कारन डाक्टर पहले दवा देकर मन को शरीर से अलग कर देता है अब हमे शरीर के सुख दुःख का कोई अनुभव नहीं होता.
श्री राम के सन्मुख होने का परिणाम-
"गरल सुधा रिपु करे मिताई,गोपद सिन्धु अनल सितलाई.
गरुअ सुमेर रेनु सम ताही,राम कृपा करी चितवा जाही".
जहर अमृत हो जाता है,शत्रु मित्र बन जाते हैं.भव समुद्र गाय के खुर के समान हो जाता है.अग्नि शीतल हो जाती है.अति भारी सुमेरु पर्वत धूल के कण के बराबर हल्का हो जाता है.जो राम के सन्मुख होता है अथवा जिसपर राम की कृपा दृष्टि पड़ती है.
श्री राम के विमुख होने के परिणाम-
"मातु मृत्यु पितु समन समाना सुधा होई विष सुन हरी जाना।।
मित्र करे सत रिपु कै करनी।ताकंह विबुध नदी बैतरनी।।
सब जग ताहि अनलहूँ ते ताता,।जो रघुवीर विमुख सुन भ्राता"।।
माँ मृत्यु हो जाती है पिता जमराज हो जाता है,अमृत जहर हो जाता है।मित्र सौ-सौ शत्रुओं के समान व्यहवार करता है।उसके गंगा भी भव समुद्र से भी ज्यादा भयंकर हो जाती है.सारा संसार अग्नि से भी ज्यादा तप्त हो जाता है.जो जीव श्री राम के विमुख होता है.अर्थात जिसके मन में श्री राम नहीं है ।
* पापवंत कर सहज सुभाऊ। भजनु मोर तेहि भाव न काऊ॥
जौं पै दुष्ट हृदय सोइ होई। मोरें सनमुख आव कि सोई॥
              पापी का यह सहज स्वभाव होता है कि मेरा भजन उसे कभी नहीं सुहाता। यदि वह (रावण का भाई) निश्चय ही दुष्ट हृदय का होता तो क्या वह मेरे सम्मुख आ सकता था?॥

* निर्मल मन जन सो मोहि पावा। मोहि कपट छल छिद्र न भावा॥

तनीयांसं पांसुं तव चरणङ्केरुहभवं विरिन्चिः

तनीयांसं पांसुं तव चरणङ्केरुहभवं
विरिन्चिः संचिन्वन्विरचयति लोकानविकलम् ।
वहत्येनं शौरिः कथमपि सहस्त्रेण शिरसां
हरः संक्षुद्यैनं भजति भसितोद्धूलनविधिम्

अर्थ -  माँ आपके कमल समान श्रीचरणों में लग्न सूक्ष्मातिसूक्ष्म रज की कृपा से ब्रह्मा निरन्तर विश्व की सृष्टि में तत्पर रहते है । भगवान विष्णु स्वयं शेषावतार धारण कर अपनें सहस्त्रों सिरों से आपकी चरण धूलि से उत्पन्न समस्त लोको को सप्रयत्न धारण करते है । भगवान भूतभावन शिव स्वयं तुम्हारी पदधूलि को सम्यक् रूप से भस्मीकृत कर अपनें अङ्गों में लगा लेते है । इस तरह ब्रह्मा , विष्णु , महेश तीनों मूर्ति पराशक्ति की आराधना कर कृतकृत्य हो जाते है ।

एक बार एक शिष्य ने अपने गुरू से पूछा की गुरूदेव !

🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸
एक बार एक शिष्य ने अपने गुरू से पूछा की
गुरूदेव ! सत्संग सुनने इतने लोग आते हैं,
क्या सभी लोग प्रभु के दर्शन कर पाते है ?
गुरूने मुस्कराकर कहा,
एक जमीन होती वहाँ कुछ भी नही उगता.
दुसरी जमीन जहॉ घास तो उघती है मगर सुखकर जल
जाती है.
और तीसरी जमीन खेती कहते है,
वहॉ जो उगाओ वही पैदा होता है.
लेकीन उसके लिये
वक्त पर पानी और धूप की जरूरत होती है.
ठिक इसी तरह जो पर्मारथ की राह पे नही चलते
वो बंजर जमीन की तरह है.
जो सत्संग मे आते तो है मगर ध्यान नही देते वो अमल
नही करते हैं, वो सुखी घास की तरह हैं
पैदा तो होती है मगर किसी काम की नही।
जो सत्संग मे आते है अपने जीवन मे अमल करते है और प्रभु के गुणगान
गाते है, वो खेती की तरह जो उगाओ
पैदा होता है।
वही इंसान प्रभु के दर्शन कर सकता है।
🌹🌸🌹🌸🌹🌸🌹

आइये आज आपको "धरती पर भगवान हैं सिद्ध करके दिखाता हूँ" :

आइये आज आपको "धरती पर भगवान हैं
सिद्ध करके दिखाता हूँ" :
१. "अमरनाथजी" में शिवलिंग अपने आप
बनता है
२. "माँ ज्वालामुखी" में
हमेशा ज्वाला निकलती है
३. "मैहर माता मंदिर" में रात को आल्हा अब
भी आते हैं
४. सीमा पर स्थित तनोट माता मंदिर में 3000
बम में से एक
का ना फूटना
५. इतने बड़े हादसे के बाद भी "केदारनाथ
मंदिर" का बाल ना बांका होना
६. पूरी दुनियां मैं आज भी सिर्फ "रामसेतु के
पत्थर" पानी में तैरते हैं
७. "रामेश्वरम धाम" में सागर का कभी उफान
न मारना
८. "पुरी के मंदिर" के ऊपर से
किसी पक्षी या विमान का न निकलना
९. "पुरी मंदिर" की पताका हमेशा हवा के
विपरीत दिशा में उड़ना
१०. उज्जैन में "भैरोंनाथ" का मदिरा पीना
११. गंगा और नर्मदा माँ (नदी) के
पानी का कभी खराब न होना
१२,श्री राम नाम धन संग्रह बॆंक में संग्रहीत इकतालीस अरब राम
नाम मंत्र पूरित ग्रंथों को (कागज होने पर भी) चूहों द्वारा नहीं
काटा जान। जबकि अनेक चूहे अंदर घुमते रहते हॆं।
13,चितोडगढ मे बाणमाताजी के मंदिर मे आरती के समय त्रिशूल का हिलना
9 लोगों को जरूर भेजो 2 दिन में बहुत बडी
खुसखबरी मिलेगी अन्यथा 2 साल तक कोई काम नहीं होगा ।

Tuesday, January 17, 2017

««« *आज का पंचांग* »»»

.     ।।  🕉  ।।
    🌞 *सुप्रभातम्* 🌞
««« *आज का पंचांग* »»»
कलियुगाब्द..................5118
विक्रम संवत्................2073
शक संवत्...................1938
मास............................माघ
पक्ष...........................कृष्ण
तिथी..........................षष्ठी
दोप 12.49 पर्यंत पश्चात सप्तमी
तिथि स्वामी...........कार्तिकेय
नित्यदेवी...........महावज्रेश्वरी
रवि.....................उत्तरायण
सूर्योदय...........07.09.47 पर
सूर्यास्त...........06.05.01 पर
नक्षत्र..........................हस्त
रात्रि 02.37 पर्यंत पश्चात चित्रा
योग.......................अतिगंड
प्रातः 11.46 पर्यंत पश्चात सुकर्मा
करण.......................वणिज
दोप 12.49 पर्यंत पश्चात विष्टि
ऋतु.........................शिशिर
दिन........................बुधवार

🇰🇾 *आंग्ल मतानुसार* :-
18 जनवरी सन 2017 ईस्वी ।

👁‍🗨 *राहुकाल* :-
दोपहर 12.37 से 01.58 तक ।

🚦 *दिशाशूल* :-
उत्तरदिशा -
यदि आवश्यक हो तो तिल का सेवन कर यात्रा प्रारंभ करें।

☸ शुभ अंक...............9
🔯 शुभ रंग...............हरा

💮 चौघडिया :-
प्रात: 07.13 से 08.34 तक लाभ
प्रात: 08.34 से 09.55 तक अमृत
प्रात: 11.16 से 12.37 तक शुभ
अप. 03.19 से 04.40 तक चंचल
सायं 04.40 से 06.01 तक लाभ
रात्रि 07.40 से 09.19 तक शुभ

🎶 *आज का मंत्र* :-
|| ॐ एकदंताय नमः ||

📣 *सुभाषितम्* :-
*अष्टावक्र गीता - द्वितीय अध्याय :-* 
यथा प्रकाशयाम्येको
देहमेनो तथा जगत्।
अतो मम जगत्सर्वम-
थवा न च किंचन॥२-२॥
अर्थात :-
जिस प्रकार मैं इस शरीर को प्रकाशित करता हूँ, उसी प्रकार इस विश्व को भी। अतः मैं यह समस्त विश्व ही हूँ अथवा कुछ भी नहीं॥२॥

🍃 *आरोग्यं* :-
*हल्‍दी दूध बनाने के सही तरीका :-*

हल्‍दी के टुकड़ें लें

हल्दी की एक इंच लंबे टुकड़े को लें। हल्दी पाउडर, हल्‍दी की स्टिक की तरह प्रभावी नहीं होता है, क्‍योंकि पाउडर में संदूषण की संभावना अधिक होती है, इसके अलावा पीसने की प्रक्रिया के दौरान हल्‍दी की गर्मी पैदा करने की क्षमता कम हो जाती है। इसलिए एक हल्दी के टुकड़े लेकर उसे क्रश करके इस्‍तेमाल करें।

पेपर्कॉर्न यानी मिर्च के दाने

फिर थोड़ी से पेपर्कॉर्न यानी मिर्च के दाने क्रश करें। काली मिर्च की जगह सफेद किस्म बेहतर रहती है। और सफेदी मिर्च यानी दखनी मिर्च आंखों की रोशनी बढ़ाने का काम करती है। अब आधा गिलास दूध और एक कप पानी लेकर उसमें आधी चम्‍मच क्रश हल्‍दी और मिर्च को मिलाकर अच्‍छे से उबाल लें।

शहद या चीनी डालें

20 मिनट उबलने के बाद इस मिश्रण को गैस से उतारकर, इस मिश्रण को छानकर उसमें शहद या चीनी मिला लें, और फिर लें गर्मागर्म हल्‍दी वाले दूध का मजा।

खांसी के लिए देसी घी मिलाये

अगर आप गले में खराश से राहत पाने के लिए इसे ले रहे हैं, तो गर्म हल्‍दी वाला दूध पीने से पहले आधा चम्‍मच देसी घी मिला लें। घी पिघल कर आपके गले पर कोट बनाकर, खांसी से अच्‍छी तरह से राहत देगा।

कुछ मिनट आराम से बैठकर इस पेय का सुखदायक स्‍वाद और रस्टिक अरोमा आपमें फील गुड फैक्‍टर की वृद्धि करने में मदद करता है।

⚜ *आज का राशिफल* :-

🐏 *राशि फलादेश मेष* :-
शत्रुजनित पीड़ा से राहत मिलेगी। कलह को बढ़ावा न दें। सतर्कता से हानि पर नियंत्रण होगा। विरोधी सक्रिय होंगे, इसके बावजूद लाभ होगा।
                        
🐂 *राशि फलादेश वृष* :-
शत्रु परास्त होंगे। पुराने मित्र से मिलन होने की संभावना है। नजदीकी व्यक्ति विरोध करेंगे। धैर्य व विवेक का साथ बनाए रखना होगा।
                      
👫 *राशि फलादेश मिथुन* :-
माता के स्वास्थ्य में गिरावट होगी। हानि, विवाद, कलह से दूरी बनाना लाभकारी रहेगा। शारीरिक सुख प्राप्त होगा। प्रमाद बढ़ेगा।
                       
🦀 *राशि फलादेश कर्क* :-
विपरीत लिंगी का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहेगा। शत्रु कष्ट देंगे। कुछ लाभ-हानि का मिला-जुला अनुभव होगा। दुर्घटना से बचें।
                     
🦁 *राशि फलादेश सिंह* :-
नेत्रों की लापरवाही ठीक नहीं होगी। मित्रों से सुख तथा लाभ की संभावना है। शत्रु शांत रहेंगे। कुसंग ठीक नहीं होता।
        
👸🏻 *राशि फलादेश कन्या* :-
संतान पक्ष चिंता देगा। दुर्घटना, हानि, चिंता का समय चल रहा है। धीरज बनाए रखना होगा। शत्रु कष्ट संभावित है।
                   
⚖ *राशि फलादेश तुला* :-
हानि, पीड़ा, कलह का दिन है। विवेक से कार्य करने का समय है। अशुभ समाचार की प्राप्ति हो सकती है। विवेकपूर्ण कार्य लाभ देंगे।
                    
🦂 *राशि फलादेश वृश्चिक* :-
जायदाद संबंधी लाभ होगा। मित्र मिलन होगा व दिन आनंददायक व्यतीत होगा। पराक्रम वृद्धि होगी। कार्यप्रणाली बनाए रखना होगी।
                      
🏹 *राशि फलादेश धनु* :-
विपरीत लिंगी से सुख तथा उसका स्वास्थ्य नरम रहेगा। कुछ अप्रिय समाचार मिलने से कष्ट होने की संभावना है। कार्य बनेंगे। धनागम होगा।
            
🐊 *राशि फलादेश मकर* :-
आलस्य, प्रमाद व अस्वस्थता हावी रहेगी। राज्य से संकट होगा। मनोमालिन्य रहेगा। धैर्य व विवेक का साथ बनाए रखना होगा।
               
🏺 *राशि फलादेश कुंभ* :-
कुसंग ठीक नहीं होता। शत्रु से राहत मिलेगी। विवेकपूर्ण कार्य लाभ देंगे। धनलाभ के आसार बनेंगे। उत्साह से कार्य करने से लाभ होगा।
               
🐬 *राशि फलादेश मीन* :-
शत्रु कष्ट संभावित है। दुर्घटना, हानि, विवाद, सतर्कता दूर होने की संभावना बनती है। अकारण भय रहेगा। स्वास्थ्य नरम रहेगा।

☯ आज का दिन सभी के लिए मंगलमय हो ।

।। 🐚 *शुभम भवतु* 🐚 ।।

🇮🇳🇮🇳 *भारत माता की जय* 🚩🚩